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रावण किस गोत्र का ब्राह्मण था ? | Ravan story in hindi | Happy Dashhara 2022

 रावण के माता-पिता पुरे परिवार के सदस्यों का नाम :- रावण के पिता का नाम ऋषि विशेश्रवा था तथा उसकी माता का कैकसी था रावण के दादा का नाम पुलुस्तमुनी था तथा रावण की पत्नी का नाम मंदोदरी था तथा रावण रावण की बहन का नाम सुपनखा था रावण के पांच पुत्र थे जिनके नाम क्रमशः मेघनाथ, अक्षय कुमार, परास्त, नारायणतक, एवं अहीरावण था इनमे से तीन पुत्र रावण के पास लंका मे रहते थे जबकी अहीरावण पाताल का राजा था और नारायणतक किष्कंधा के आसपास रहता था रावण कि पुत्री का नाम कुम्भनिशि था रावण के एक सगा भाई कुम्भकरण था तथा एक कर पकङा भाई विभीषण था

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रावण कोनसे गोत्र का ब्राह्मण था :- रावण शारस्वत गोत्र का ब्राह्मण था, 


क्या रावण बुरा था :- दोस्तो आम जन मानुष की धारणा है की जब भी हम कभी कीसी बुरे आदमी को देखते है तो कहते है ये कलयुग का रावण है मतलब हम हर एक बुरे ईन्सान की तुलना रावण से करते है हम सभी के दिमाग मे ये अवधारणा पैदा कर दी गई है की रावण बुराई का पालक या प्रतिक है मतलब हम सभी का ब्रेन वाॅश किया गया है जैसे एक आतंकवादी का किया जाता है की आप दुनिया के किसी भी इन्सान को मारोगे तो वो एक जैहाद है आतंकवादी को सच से दुर रखा जाता है की जिहाद का मतलब अपने खुद की बुराईयो को मारना ईस तरह हमारे दिमाग मे भी ये चीज सदीयो से डाली गई है कि रावण बुरा था पर क्या सच मे रावण बुराई का पालक था तो आईये इन बातो का तर्क सहीत विश्लेषण करते है 




: रावण ब्राह्मण कुल मे पैदा हुआ तथा ऋषियो की सन्तान था तथा चार वेद छ: शास्त्र और अठारह पुराण का ज्ञाता था उसे सब कुछ पता था की राम कोन है लक्ष्मण कोन है सीता कोन है रावण ने स्वंय भी कहा है :- जान्मं रामम् मधुसूदनम् जानम् लक्ष्मणम् शेषावतारम् जानम् सीता स्वप्र्णी  के जानता हु कि राम विप्णु का अवतार है लक्ष्मण शेषावतार है सीता माता लक्ष्मी का अवतार है ।


: मतलब रावण को सब कुछ पता था फिर भी वो सब कुछ जान बुझ कर कर रहा था क्योंकि जिससे उसकी मोक्ष हो जाये अब आपके मन मे भी ये प्रश्न उठा होगा की अगर रावण सीता का हरण न करता और श्री राम की शरण मे चला जाता तो भी उसकी मोक्ष हो जाती तो उसे इतनी बुराई भी नही मिलती पर आप जरा सोचिए रावण श्री राम की शरण चला जाता तो फिर उसे श्री राम से युद्ध नही करना पड़ता और अगर उसके और श्री राम के बीच युद्ध ना होता तो लंका मै ऐसे ऐसे बलवान योद्धा थे उनकी मोत/मोक्ष कैसे होती जैसे मेघनाथ को वोही योद्धा मार सकता था जिसने नींद नारी अन्न का 12 साल तक परित्याग कीया हो और लक्ष्मण जी ऐसे योद्धा थे जिसने नींद नारी अन्न का 12 साल तक परित्याग किया था तो राम रावण का युद्ध ना होता तो लक्ष्मण जी मेघनाथ को क्यो मारते और लक्ष्मण जी नही मारते तो उनकी मोत नही होती मेघनाथ जैसे अनेक योद्धा लंका मे मौजूद थे तो इस कारण रावण ने श्री राम से युद्ध कीया और सीता का हरण किया 




सिता के हरण के अलावा रावण का आप कोई ऐसा कार्य बता तो जिससे मानव जाती का हनन या नुकसान होता हो आप नीचे कमेंट करके बता सकते है पर मुझे यकीन है आप नही बता पायेंगे क्योकि उसने और कुछ गलत कीया ही नही तो आप कहा से बता पायेगे 




रावण का मानव जाति के हित मे किये कार्य :- कहते है रावण एक बार यमराज से मिलने को गये वहा पर उसने देखा कि यहा पर 14 नर्क कुण्ड है और प्रथ्वी से जैसे ही मनुष्य लाया जाता है उसे नर्क कुण्ड मे डाल देते है रावण से यह देखा नही गया और उन्होने यमराज से कहा की इन सभी कुण्डो को बन्द कर दो ( यमराज जो की रावण का आदेश टाल भी नही सकता था क्योकि आदेश टालना मतलब रावण से शत्रुता करना था जो यमराज को बङा नुकसान पहुचा सकती थी और अगर आदेश मान भी ले तो प्रथ्वी पर लोगो के मन मे नर्क का भय ना रहेगा और वो बुराई पर बुराई करेगे) तो ईसलिये यमराज ने एक रास्ता निकाला उसने रावण से कहा कि आप के कहने से मे 7 नर्क कुण्डो को बन्द कर देता हु और आप जब दुबारा यहा आयेगे तो 7 को और कर देगे रावण ने कहा की ठीक है ऐसा ठीक रहेगा ईस तरह मानव हित के लिए रावण ने 7 नर्क कुण्ड बन्द करवा दीये तो अब आप बताईये कैसे आप रावण को राक्षस या बुराई का पालक कहेगे 




रावण के मानव हीत के लिए विचारे गये कार्य जिसे रावण पुरा ना कर पाया :- रावण ने सात कार्य बिचारे थे जो मानव हित मे थे पर उसे रावण पुरा नही कर पाया 


एक अग्नि अच्छी वस्तु है मनुष्य के जीने मरने मे काम आती है मगर ईसमे धुआँ है इसे बन्द कर दुं और वह कर सकता था क्योकि अग्निदेव उसकी लंका मे रसोई बनाता था पर उसने सोचा फिर कभी कर दुगा और नही कर पाया 


दुसरा सोना अच्छी वस्तु है बहुत सुन्दर होता है पर ईसमे सुगंध नही ईसमे सुगंध कर दु तो बहुत अच्छा हो और कर वो कर सकता था क्योकि कुबेर उसके यहा खजांची था पर उसने सोचा फिर कभी कर दुगा और नही कर पाया 


तिसरा प्रथ्वी से लेकर स्वर्ग तक सीढ़ीयो का निर्माण करा दु तो हर एक मनुष्य अपने परिवार जनो से मिलकर आ सके और यह कार्य वह कर सकता था क्योकि विश्वकर्मा जी उसकी लंका मे टुठ फुठ सुधारता था पर उसने सोचा फिर कभी कर दुंगा और नही कर पाया 


चौथा कार्य उसने सोचा लंका के चारो तरफ समुद्र है वह खारा है तथा पानी पे काई आ जाती है तो पानी को दूषित कर देती है मे ईस पानी को मिठा तथा काई को नष्ट कर दु और यह कार्य कर सकता था क्योकि वरूण देव उसकी लंका मे पानी भरता था पर उसने सोचा फिर कभी कर दुगा और नही कर पाया 


पाचवा कार्य उसने सोचा कि हर एक मनुष्य को ये काल खा जाता है और उसकी म्रत्यु हो जाती है तथा जब मा के सामने उसका बेटा मरता है तो उसे बङा दुख होता है मे इस काल को ही मार डालु जिससे किसी की मौत ना हो और वह यह कार्य कर सकता था क्योकि काल उसकी पलंग के पाये से बंधा हुआ था पर उसने सोचा फिर कभी कर दुगा और कल कल करते वो काल उसका ही बन बैठा 




तो अब आप बताईये ये सब कार्य उसने मानव जाति के हित मे बिचारे थे तो कैसे वो बुरा हो सकता है फिर भी हम उसे बुराई का प्रतीक मानते है उसके पुतले को हर साल जलाकर खुश होते है कैसी विडंबना है 


आप एक बार जरूर सोचना और कमेंट मे बताना की वास्तम मे रावण बुरा था या अच्छा 




पोस्ट पढने के लिए आपका धन्यवाद 


Not:ये सभी बाते रामायण जि तथा अन्य श्रोत तथा किवदंती के अनुसार बताई गई है


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